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बादल चाचा क्यूं बरसे

रश्मिरथी
जनवरी माह में दिल्ली की कड़कडाती बारिश की 
👩‍👧 बाल कविता👩‍👧
बादल चाचा बादल चाचा क्यूं बरसे
इतने गरज़ गरज़ कर क्यूं बरसे
कड़ कड़ बिजली बुआ बरसती
क्या वो हम से कहने को कुछ है तरसती
गड़ गड़ तुम क्या बतलाते
घुमड़ घुमड़ रौब जताते
कितना चिढ़ चिढ़ कर हमें डराते
सर्दी में भी हर घण्टे पानी टपकाते
 ठिठुरन इतनी ना बढ़ाओ
थोड़ा हम पर दया दिखाओ
जब सावन आये तब आजाना
स्वागत करें तो मत इतराना
अभी तो तुम घर जाओ
मुझको सर्दी लगती है
ओर पानी न बरसाओ।।

मम्मा की लेखनी
ज़िया की जुबानी👩‍👧
( ज़िया )भारती प्रवीण...✍️💕

मानव चलचित्र

रश्मिरथी
चलचित्र सा हो चला है मन
चलचित्र सा हो चला है जीवन
ना परवाह किसी की
ना इज्जत किसी की
आत्मा ना जाने कहाँ विचरण कर रही,
मानवता मुँह ताके बस देख रही
अत्याचार बन चुका व्यवसाय अब
चलचित्र सा बन चुका है मनुष्य अब,
धोखा, फरेब और झूठ का
बढ़ गया व्यापार अब,
संस्कार और देशप्रेम का
कम हो चला रुबाब अब,
वक़्त बीत रहा तूफ़ान की गति समान,
हो रहा विनाश धरती का
अब तो जाग जा इंसान,
छोड़ यह कुकृत्य,संस्कार का पाठ पढ़,
आत्मा को ज्ञान का पाठ पढ़ा
काम, क्रोध लोभ मोह का न हो कहीं भी अस्तित्व,
भक्ति सागर का रसपान कर
पाना है सच्चाई का भक्तित्व...

निकेता पाहुजा
रुद्रपुर उत्तराखंड